Monday, July 5, 2010

लोहे की रेल लोहे के दिल


भारतीय रेल का खेल बचपन से ही मुझे बहुत अच्छा लगता है तब .हम मे से कोई इंजन बन जाता और बाकि डिब्बा बन कर उसमे लग जाते फिर जो उधम मस्ती होती उसका कहना क्या ?रेल की यात्रा का आपना मजा तो आज भी है सब कुछ बदल गया है पर रेल का खेल वही अंग्रेजो के जमाने का ही है लोहे की रेल लोहे के दिलो से छुक छुका रही है .
लालू जी की रेल का अपना रुतबा था दीदी की रेल अपनेतरीके सेभाग रही है रही यात्रियों की बात तो वे बेचारे तो सदा से उपरवाले के भरोसे ही रहे है सो आज भी उसी तरह जान हथेली पर धरे चलते है झारखण्ड बंगाल व् बिहार की रेल यात्रा नक्सली भाइयो की किरपा पर है .उनकी इच्छा होगी तोही यात्री घर वापस होगा .कोंन ट्रेन कब चलेगी औरकहा रुकेगी किसी को पता नहीं ?
खैर मै कह रहा था की रेल तो लोहे की बनी होती है इस लिए इसकी यात्रा भी लोहा बन कर ही होती है रेल वाले तो खैर यात्रियों को लोहा ही मानते आये है आप ने स्टेशन परिसर मे प्रवेश किया नहीं की लोहे मे तब्ब्दिल हो गए .
मै कल अपने बेटे को ट्रेन मे बिठानेगया था पहेले चार्ट मे बोगी की पोजीसन खोजने का प्रयास किया फिर पूछताछ वालो से रिरियाया परनतीजा सिफ़र. मन मार कर प्लेटफ़ॉर्म पर आया की मॉडल स्टेशन के ख़िताब से नवाजा गया स्टेशन बोगी की स्थिति को बता ही देगा पर नहीं, रेल गाड़ी के आने की सुचना भर दी गयी .
एक बुजुर्ग दम्पति हर किसी से” वातानुकूलित बोगी आगे है की पीछे लगी है” की रट लगा रहे थे और लोग जबाब मे “ट्रेन आने पर पता चलेगा ” कह कर पल्ला झाड़ रहे थे . मैंने उन्हें तस्सली देने की कोसिस की तो बोले आप लोग तो भाग कर भी बोगी में बैठ जायेगे पर हम तो ऐसा नहीं कर पायेगे .कोच नंबर डिस्प्ले का बोर्ड लटकाया है इन लोगो ने आखिर किस लिए ? मित्रो जबाब तो मेरे पास नहीं था पर उनकी मदद तो कर ही सकता था ट्रेन के नौ डिब्बो को पर कर उनको सीट पर पंहुचा कर मैंने बेटे को उसकी बोगी मे बैठाया .यह बात किसी एक स्टेशन की नहीं है यह अक्क्सर हर स्टेशन पर लोगो के साथ घटने वाली आम बात है कई बारगाड़ी आने के ऐन वक़्त प्लेटफ़ॉर्म बदल दिया जाता है जो छोटे बच्चो के साथ यात्रा करने वालो व बुजुर्गो के लिए जोखिम
भरा साबित होता है पर इन लोहे के दिल वालो को इतना सोचने की जरुरत क्या है?
बोगी में पानी नहीं है तो क्या? इनको पानी की जरुरत समझ ने की क्या पड़ी है ?पानी बेकार में बहा देगे पर यात्रियों को नहीं मिलेगा .
रेल यात्रा में अगर आप का पाला हिजड़ो से नहींपड़ातोआपयक़ीननखुदकोभाग्यसाली
मान सकते है

6 comments:

  1. Railway ki achhi pol Kholi hai aapne

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. सटीक वर्णन...आपकी अभिव्यक्ति की शैली प्रभावकारी है...
    ब्लागिंग की दुनिया में आपका स्वागत है. हिंदी ब्लागिंग को आप नई ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है....
    इंटरनेट के जरिए घर बैठे अतिरिक्त आमदनी के इच्छुक ब्लागर कृपया यहां पधारें-
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  4. तलाश जिन्दा लोगों की ! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!
    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in
    --------------------
    http://presspalika.blogspot.com/

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  5. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  6. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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